Principal Message

Welcome to Govt. Daanveer Tularam College, Utai,Distt.- Durg

प्राचार्य की कलम से ...............

बढ़ें हम, पायें स्वर्णिम लक्ष्य, समन्वय-अनुशासन के साथ .....


प्रिय प्रवेशार्थी! दुर्ग जिले के ग्रामीण क्षेत्र में अनेक सन्दर्भों में बड़े और विशिष्ट इस शासकीय दानवीर तुलाराम महाविद्यालय उतई में आपका आत्मीय स्वागत है, अभिनन्दन है। गाँव और शहर के मिलन बिन्दु पर संस्थित ये संस्थान, 16 अगस्त 1989 को संस्थापित हुआ। रजत जयन्ती मनाकर, 27 वर्ष की अपनी उन्नति, निरन्तर प्रगति के और गौरव के पूर्ण कर अब स्वर्णिम लक्ष्य की ओर अग्रसर है। अनेक विशिष्ट उपलब्धियों और मानकों से सम्पन्न इस महाविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद् (NAAC) ने ’बी’ ग्रेड देकर सम्मानित किया है। 



बेटी पढ़ाओ-बेटी बढ़ाओ -

आस-पास के ग्राम्य अंचलों से आकर यहाँ प्रायः 1300 प्रतिभायें पठन-पाठन कर रही हैं। बेटियों की संख्या अधिक है। बेटों से डबल। हाँ बेटियों के लिये एक और खुशखबरी यह भी है कि ’मुख्यमन्त्री शुचिता योजना’ के अन्तर्गत सेनेटरी वेण्डिंग मशीन हाल ही में लगाई जा चुकी है। प्रदेश की माननीया मन्त्री, महिला एवं बाल विकास श्रीमती रमशीला जी साहू के एतदर्थ हम आभारी हैं। यद्यपि मुख्यतः ’बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ’ का भाव है,’ परन्तु ये सब मिलकर अध्ययन-मनन के साथ, उच्च जीवन मूल्यों के धरातल पर शिक्षणेतर गतिविधियों के माध्यम से भी गुरुजनों के मार्गदर्शन में अनुशासन और समन्वय के साथ अपने बहुमुखी व्यक्तित्व के विकास की ओर अग्रसर हैं। राष्ट्र और समाज की बहुविध सेवा महाविद्यालय परिवार का परम कत्र्तव्य और चरम लक्ष्य है। हमें नये कीर्तिमान रचना है। हम सब का समन्वित और अनुशासित प्रयास होना चाहिये कि हम पढ़ें, बढ़ें और अपने साथ राष्ट्र का भी भविष्य गढ़ें। क्योंकि-


“लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती।

कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।।”



ग्रामोदय बनाम भारतोदय -

राष्ट्र की प्रगति और स्वाभिमान के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध भारत के विश्वप्रिय प्रधानमन्त्री मान्यवर श्री नरेन्द्र मोदी जी का विचार है कि- ग्रामोदय से भारतोदय सम्भव है। इस चिन्तन की साहित्यिक पृष्ठभूमि में जायें ंतो राष्ट्रीय साहित्य की अमर पंक्तियाँ याद आती हैं- है अपना हिन्दुस्तान कहाँ? वह बसा हमारे गाँवों में। अनेकानेक गाँवों की प्रतिभाओं को तराशने में लगा ये महाविद्यालय उपर्युक्त दोनों महान् व्यक्तित्वों की भावना को साकार करने का एक महत्वपूर्ण कत्र्तव्य क्षेत्र हो सकता है और निश्चित रूप से छ.ग. शासन, जनप्रतिनिधिगण, समाजसेवी, प्रेस एवं मीडिया के मित्रगण और स्वयं महाविद्यालय परिवार इन सबको जोड़कर सबसे जुड़कर संस्था के सर्वतो मुखी विकास के प्रति संलग्न है। महाविद्यालय के पास बहुत कुछ है, किन्तु अभी और बहुत कुछ के लिये सबसे मिलकर लगातार कोशिश कर रहे हैं, करना है और करते रहेंगे। सबसे बड़ी उपलब्धि तो यह है कि शुद्ध पर्यावरण और प्राणवायु से लबरेज हमारा कैम्पस है। 22 एकड़ जमीन हमारे पास है। ’रुसा’ (राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान) के तहत दो करोड़ रुपये की लागत से 8 अतिरिक्त कक्षों के साथ महाविद्यालय भवन का विस्तार प्रायः पूरा हो चुका है। अब आधारभूत संरचना की कोई कमी या समस्या नहीं है। इस विशालतम कैम्पस की बाउण्ड्रीवाॅल बन जाती तो, सुरक्षा की भी कोई अनहोनी या आशंका नहीं होती। इसका लगभग एक करोड़ का स्टीमेट प्रायः 02 वर्ष पूर्व ही शासन की सेवा में प्रेषित किया गया है। हमें विश्वास है, हमारे संवेदनशील प्रशासन पर कि बाउण्ड्रीवाॅल का निर्माण भविष्य में अवश्य होगा। आने वाले समय में ये काॅलेज इस क्षेत्र का एक प्रसिद्ध और विशाल उच्च शिक्षा संस्थान बनेगा। वर्तमान ही भविष्य को सँवारेगा। हम स्वाभिमानी और आत्मविश्वासी हैं। राष्ट्र कवि मैथिलीशरण जी गुप्त के कालजयी काव्य की पंक्तियाँ प्रेरणा देती हैं- 

अपने युग को हीन समझना, आत्महीनता होगी, 

सजग रहें, इससे दुर्बलता और दीनता होगी। 

जिस युग में हम हुये, वही तो अपने लिये बड़ा है, 

अहा! हमारे आगे कितना कर्मक्षेत्र पड़ा है?



मेरिट में लगातार बढ़ोतरी -

प्रायः प्रति वर्ष महाविद्यालय का परीक्षा परिणाम उत्तम रहा है। विगत वर्ष भी विद्यार्थियों ने अच्छे अंक प्राप्त किये। स्नातकोत्तर कक्षाओं में अधिकांश विद्यार्थी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुये। विश्वविद्यालय की प्रावीण्य सूची में वनस्पति शास्त्र की छात्रा कु. योगिता साहू  ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। इस वर्ष यही गौरव कु. निशा देशलहरे को प्राप्त हुआ। एम.ए. राजनीति शास्त्र के छात्र अमर दास भी इस वर्ष विश्वविद्यालय की मेरिट के टाॅपटेन मंे अपना स्थान बनाने में सफल रहे। उन्होंने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर की प्रावीण्य सूची में दसवाँ स्थान प्राप्त किया। स्वाभाविक है कि नव प्रवेशित विद्यार्थी इनके गुणों को अपनायेंगे। क्योंकि लक्ष्य अभी आगे है, पर उसे पाना तो है-

“तिपे चाहे भोंभरा, झन बिलमव छाँव म।

जना है हमला, ते गाँव अभी दुरिहा हे।।”



राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) का नागालैण्ड तक डंका -

महाविद्यालय में छात्राओं की संख्या अधिक है। राष्ट्रीय कैडेट कोर की छात्रा इकाई यहाँ पूरी तरह से सक्रिय है। एन.सी.सी. की छात्राओं ने उत्तरकाशी और नागालैण्ड में काॅलेज के झण्डे गाढ़े हैं। नागालैण्ड में आयोजित ’राष्ट्रीय एकता कैम्प’ में सक्रिय भागीदारी निभाते हुये, अखिल भारतीय स्तर पर छत्तीसगढ़ी जनजीवन, कला और संस्कृति का परचम फहराया। वहाँ के राज्यपाल महोदय पद्मनाभ बालकृष्ण आचार्य ने हमारे इन कैडेट्स को पुुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया। यही नहीं एन.सी.सी. के राष्ट्रीय पर्वतारोहण कैम्प उत्तरकाशी हेतु भी हमारी छात्रायें कु. किरण यादव एवं कु. लेखा बंजारे का चयन हुआ। इन्होंने ’नेहरु इंस्टीट्यूट आॅफ माउण्टेनिंग’ (एन.आई.एम.) में राॅक क्लाइबिंग के गुर सीखे और विशेषज्ञता हासिल की। कु. किरण यादव को तो इस आॅल इण्डिया कैम्प की विविध प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर प्रथम स्थान भी प्राप्त हुआ। किन्तु-

’इस पथ का उद्देश्य नहीं है, शान्त भवन में टिक रहना।

किन्तु पहुँचना उस सीमा तक, जिसके आगे राह नहीं।।”



खेलकूद में भी आगे -

विद्यार्थियों के सम्पूर्ण विकास के लिये पठन-पाठन के साथ-साथ खेलकूद का भी विशेष योगदान है। काॅलेज के खिलाड़ी छात्र-छात्राओं ने खेलकूद में भी महत्त्वपूर्ण कीर्तिमान कायम किये हैं। महाविद्यालय की 10 टीमों ने विविध क्रीड़ा प्रतियोगिताओं में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। काॅलेज के छात्रों गजेन्द्र, तेजराम और पीयूष कुमार ने अ.भा. विश्वविद्यालयीन तैराकी प्रतियोगिता में दुर्ग विश्वविद्यालय, दुर्ग का सफल प्रतिनिधित्व किया। जबकि मंगलोर विश्वविद्यालय में आयोजित क्राॅस कण्ट्री रेस में काॅलेज के विद्यार्थी गुलाब चन्द्र साहू, कु. अमना, कु. भारती, कु. कुन्ती सिन्हा एवं कु. धन्वन्तरीन ने भी दुर्ग विश्वविद्यालय, दुर्ग का प्रतिनिधित्व किया। कोयम्बटूर और विश्वभारती पं. बंगाल आदि स्थानों पर एथलेटिक्स और खो-खो प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट खेल प्रदर्शन कर न केवल महाविद्यालय अथवा विश्वविद्यालय को अपितु सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ को भी गौरवान्वित किया। स्वर्णिम इतिहास भी हमें और आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है-

“बिल्लस खेला होगा राम ने, यहीं मनाया होगा पोरा।

कौशल्या का मायका, छत्तीसगढ़ धान का कटोरा।।”



साहित्य, कला और संस्कृति -

पठन-पाठन, एन.सी.सी., रा.से.यो. एवं खेल गतिविधियों के ही समान साहित्य, कला, संस्कृति एवं रंगमंचीय कौशल प्रदर्शन हेतु महाविद्यालय विद्यार्थियों को व्यापक अवसर प्रदान करता है। विविध विषयों पर निबन्ध लेखन प्रतियोगितायें, वाद-विवाद प्रतिस्पर्धायें, रंगोली, अल्पना सलाद सज्जा एवं प्रश्न मंच हेतु मार्गदर्शन पूर्वक अभ्यास कराने में मार्गदर्शन का कार्य शिक्षकीय एवं अन्य स्टाफ करता है। उसी का परिणाम है कि ’पागलखाना’ और ’डिजिटल इण्डिया’ जैसे हमारे नाटकों की मंचीय प्रस्तुतियों को न केवल भरपूर सराहना ही मिली, अपितु बड़ी प्रतिस्पर्धाओं में उन्हें प्रथम स्थान भी अर्जित किये। कमल नारायण और कु. पूषण ओझा को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के पुरस्कार भी प्राप्त हुये। राष्ट्रीय मतदाता जागरूकता को लोकप्रिय बनाने वाली नाट्य प्रस्तुतियों में गुलशन एवं साथियों को प्रथम तथा परमेश्वर एवं साथियों को द्वितीय स्थान प्राप्त हुये। इस विवरणिका में संलग्न अकादमिक कलैण्डर और सांस्कृतिक कलैण्डर के माध्यम से वर्ष भर की योजना के अनुसार तैयारी की जा सकती है। एक रूपरेखा हमारे पास है, हम इसमें इन्द्रधनुषी और मोरपंखी रंग भरकर महाविद्यालय की भव्य और आदर्श तस्वीर बना सकते हैं। साहित्य के काव्य आदि विविधभेद हमें हमेशा ऊर्जा देते हैं। आप तेजस्वी और ओजस्वी कवि नचिकेता के गीतों में प्रेरणा को देखें -

’जब तक जिजीविषा में उष्मा है, साँसों में लय है,

                               आँखों में सपने हैं, जिज्ञासा है, विस्मय है।

आग बदल लेती जब तक, अपना आचरण नहीं,

                               तब तक गीतों से होगा मेरा अन्तरण नहीं।।’



अनुशासन और नियमित उपस्थिति

उक्त और आगामी सभी लक्ष्य तो इन्हीं दो प्रयासों से सुलभ होंगे। परन्तु सभी लक्ष्यों की प्राप्ति का एक ही सूत्र है निरन्तर, नियमित और अनुशासन के साथ पढ़ाई में मन लगाकर कक्षाआंे में 75ः से अधिक उपस्थिति और वह भी आत्मानुशासन, विनम्रता, और शालीनता में रहकर। चूँकि काॅलेज में अनुशासनहीनता, रैगिंग आदि पूर्णतः निषिद्ध है; इसलिये हर हालात में विद्यार्थियों को इनसे दूर रहना है। मर्यादित आचरण करते हुये शालीन भाषा शैली में अपनी बात रख सकते हैं। नियमों-शासनादेशों, छात्रीय आचार संहिता का परिपालन हर हालत में कड़ाई से करना है। महाविद्यालय में मुख्य प्रवेश द्वार के दायीं ओर एवं प्रवेश विवरणिका के पृ.क्रं. 8 पर इनका इसीलिये स्पष्ट विस्तृत और प्रामाणिक उल्लेख किया गया है। ’हमको पता नहीं था ’कहकर बचना सम्भव नहीं है।’ अनुशासन हीनता अक्षम्य अपराध है, इसके विरुद्ध कड़ी कार्यवाही हो सकती है। इसलिये जीवन में अनुशासित रहकर उच्च लक्ष्यों की ओर बढ़ें -

अभिवादनशीलस्य,   नित्यं    वृद्धोपसिविनः।

चत्वारि तस्य वर्धन्ते, आयुर्विद्या यशो बलम्।।


विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और शैक्षिक पर्यटन-

यद्यपि महाविद्यालय के अनेक प्रबुद्ध, अनुभवी और विशेषज्ञ शिक्षक, विद्यार्थियों का अपेक्षित मार्गदर्शन करते हैं, तथापि तुलनात्मक अध्ययन, शैली बदलाव और विशेषज्ञता के नाते अनेक बार अतिथि विद्वानों और विशेषज्ञों के चुनिन्दा व्याख्यान कराये जाते हैं। निश्चित रूप से विद्यार्थी इससे लाभान्वित भी होते हैं। प्राचार्य स्वयं भी साहित्य एवं पर्यावरण की निर्धारित कक्षायें लेते हैं। इसके अतिरिक्त आमन्त्रित अतिथि विशेषज्ञगण विधि, न्याय, भ्रष्टाचार निषेध, सतर्कता सप्ताह, विज्ञान, तकनीकी, डिजिटल ज्ञान, साहित्य, भाषा, रोजगार के अवसर, संस्कृति, धर्म, वाणिज्य, यातायात सुरक्षा, कम्प्यूटर, साइबर, पर्यावरण, चिकित्सा, खाद्य, पोषण, योग, स्वास्थ्य एवं नैतिक शिक्षा आदि पर उपयोगी एवं व्यावहारिक मार्गदर्शन देते रहे हैं। पर्यटन और भ्रमण भी विद्यार्थियों के ज्ञानवर्धन में विशेष सहायक रहे। एक ताजगी, थोड़ा अलग हटकर और मनोरंजन के साथ, बच्चों ने पर्यावरण की चलित कक्षा का आनन्द उठाया। जंगल सफारी, तरीघाट, पुरखौती मुक्तांगन एवं औद्योगिक क्षेत्र आदि के शैक्षणिक भ्रमण में विद्यार्थियांे ने इतिहास, संस्कृति, जैवविविधता, वन्यप्राणी संरक्षण एवं वाणिज्य व्यापार के गुर सीखे।



प्लेसमेण्ट-’उड़ान’ -

महाविद्यालय केवल शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल आदि में ही विद्यार्थियों को केवल सुयोग्य ही नहीं बनाता, अपितु उन्हें विविध रोजगार, जाॅब्स और सेवाओं हेतु भी सक्षम बनाता है। पाक कला में स्वरोजगार, मशरुम कल्टीवेशन, स्पोकन इंग्लिश और सम्प्रेषण क्षमता, प्राणी विज्ञान में रोजगार के अवसर तथा जिलेट और भास्कर की वर्कशाॅप जैसे अनेक सफल मार्गदर्शी कार्यशालायें आयोजित की गईं। कैरियर्स काउंसलिंग, एम्प्लाइमेण्ट्स  गाइडेंस और जाॅब अपोर्चुनिटी सेल्स के माध्यम से उनके प्लेसमेण्ट हेतु भी महाविद्यालय कोशिश करता है। पढा़ लिखाकर सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कराने में भी महाविद्यालय यथाशक्ति भरपूर सहयोग करता है। दो-दो सूचना बोर्डों पर अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराई जाती है। शिक्षकों ने प्रतिमाह स्वैच्छिक सहयोग राशि से एक महत्वाकांक्षी योजना उड़ान की शुरुवात की है। जिससे कि धन और साधन की कमी के कारण कोई विद्यार्थी स्वर्णिम अवसरों से वंचित न रहे। मुख्यमन्त्री युवा स्वावलम्बन योजना (MYSY) से जोड़कर स्वरोजगार के लिये बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को प्रेरित किया है। लाइबलीहुड काॅलेज जैसी अनेक जाॅब देने वाली संस्थायें भी काॅलेज से सम्पर्क करती । किन्तु एतदर्थ विद्यार्थियों में भी उत्साह और जागृति जरूरी है।



भविष्य की अभिलाषायें -

केन्द्र और राज्य शासन की एक से एक योजनायें हैं, हम सब मिलकर उनका लाभ उठायेंगे। इनकी सूचनाओं से भी समय-समय पर आप अवगत होते रहें। इसका लाभ ये होगा कि आप सभी जागरूक रहकर अद्यतन-अवगत होते रहेंगे। सबसे महत्वपूर्ण है कि वनस्पति विज्ञान, राजनीति विज्ञान और हिन्दी साहित्य की स्नातकोत्तर कक्षाओं का संचालन स्ववित्तीय या जनभागीदारी मद से न होकर शासन की तरफ से हो। बजट सेटप के साथ तीनों विभागों में एक-एक प्राध्यापक और कम से कम दो-दो सहायक प्राध्यापक एवं लैब स्टाफ पद स्वीकृत हों। ये पद यथाशीघ्र भरे जायें। इसी तरह अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, प्राणी विज्ञान, गणित, रसायन विज्ञान, इतिहास एवं अर्थशास्त्र में भी स्नातक कक्षायें प्रारम्भ हो। भूगोल, गृहविज्ञान, संस्कृत और भूगर्भ शास्त्र जैसे विषय स्नातक स्तर पर बजट सेटप के साथ प्रारम्भ हों। नया और बड़ा भवन तैयार है, बस पद सृजन और पदस्थापना होना है। काॅलेज का एप्रोच रोड बहुत ही सकरा है, दुर्घटना का भय रहता है, चैड़ीकरण हो। बाउण्ड्रीवाल, सेमीनार हाॅल, मैदान समतलीकरण और कैम्पस में दो ग्रीन शेड निर्माण बहुत उपयोगी सिद्ध होंगे। छात्रहित में शासन कृपाकर अवश्य पूर्ण करेगा। अन्ततः पढ़ने और बढ़ने की अभिलाषा और अपेक्षायें युवा वर्ग से ही कुछ ऐसी हंै कि -

स्वयं को दो महा विस्तार, 

बनकर शक्ति का सूरज,

कि हर आकांक्षा के पूर्व ही, 

विवश होकर स्वयं ईश्वर, 

तुम्हारे पास आकर जानना चाहे 

कि अपराजेय! 

तुमको और क्या दे दूँ? 

स्वयं बोलो!


आगच्छ, स्वागतम्! स्वस्ति ते!! भवतु ते शुभम् !!!



डॉ. महेशचन्द्र शर्मा 

प्राचार्य

शासकीय दानवीर तुलाराम महाविद्यालय उतई, दुर्ग (छ. ग. )